Tuesday, January 25, 2011

कश्मीर और मेरा वजूद


आज 25 जनवरी है और कल हमारा 62व गणतंत्र दिवस है इस पवन दिन पे हमारे देश की राष्ट्रपति महोदया राजपथ पर तिरंगा फह्रेंगी और सेना को सलामी देंगी. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा राष्ट्र एक गणतंत्र राष्ट्र है और हम 26 जनवरी को हर साल इसे मानते और दुनिया को ये सन्देश भी देते है की हम एक मजबूत और मह्तवपूर्ण राष्ट्र बन कर उभर रहे हैं.

आज जब की हर तरफ देशप्रेम का माहौल होना चाहिए ऐसे मे भारतवर्ष का एक राज्य जिसे विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है वहां, राष्ट्रीयता और तिरंगे का खून किया जा रहा है सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां के मुख्यमंत्री (यानि की मै) का अपना कोई वजूद नहीं है, और मै यही नहीं समझ पा रहा हूँ की कश्मीर मे मेरा क्या भविष्य है.. मुझे यह जानने मे ज्यादा दिलचस्पी है की क्या मै इस पद के लायक हूँ. क्या मै एक राज्य को अपने बलबूते पर चला सकता हूँ या फिर मुझे हर कार्य करने से पहले अपने पिताजी(केंद्र सरकार) या फिर अपने आकाओं जो की मेरे राज्य से दूर बैठे हैं से सलाह मशविरा करना होगा. मुझे ये समझाना बहुत ज़रूरी है की मेरा अपना वजूद क्या है. और क्या मै इस लायक हूँ की मै अपने फैसले खुद ले सकूँ

ऐसे समय जब की मुझे एक सन्देश अपने राज्य के लोगों को देना चाहिए की मै जो कर रहा हूँ उसमे आप लोगों का और हमारे राज्य का भला है पर मै ऐसा न करके ये बता रहा हूँ की मेरे बस में कुछ नहीं है जैसा केंद्रीय सरकार और फिरका परस्त लोग कहेंगे मै वैसा ही करूँगा. मुझे शायद अच्हा लगता है जब कोई मेरे देश को गली देता है, और मुझे तब भी अच्हा लगता है जब मेरे राज्य मे गैर मुल्क का झंडा फहराया जाता है.. हाँ शायद मुझे तब भी अच्हा लगता है जब जब मेरे सिपाहियों पर पत्थर फेके जाते हैं और वे घायल होते हैं. मुझे ये नहीं समझ आता की इन सिपाहियों को मेरे लिए और मेरे इस राज्य के लिए पत्थर क्यों खाना पड़ता है और वो भी उन लोगों से जो की चाहते हैं की मेरा राज्य भी उनके देश की तरह बर्बाद और अंधरे मे चला जाये. मै नहीं चाहता की मेरे भाई जो की मेरे देश भारत के विभिन्न भागों मे रहते हैं की तरह स्वाभिमानी बनू और उनकी तरह सर उठा के चलू मुझे शायद ये पसंद नहीं है क्योंकि मैंने कभी अपने लिए ऐसा नहीं सोचा आज अगर मै इस राज्य का मुख्यमंत्री बना हूँ तो इसमे मेरी कोई योग्यता नहीं है ये तो मुझे विरासत मे मिली है.

मै कहाँ जा रहा हूँ और क्या कर रहा हूँ ये समझाना मेरे लिए शायद बहुत ज़रूरी नहीं है

Thursday, January 13, 2011

One Nation One Constitution

Dear Friends,

As we are entering in our 62nd Year of adopting the Constitution, I have a question to ask are we still united and democratic? I have a doubt. Kashmir being an Integral part of India which our constitution also says but the Separatist doesn’t want to be called themselves as an Indian, reason being they have been funded by the enemies and above all had also got good support from our Union Government so that they can keep situation volatile. That’s a plan which our Central Government wants to keep alive for diverting the minds of the countrymen from the core and important issues like inflation and corruption.

Anyway that’s one of the thing right now “Bhartiya Janta Yuva Morcha” is organizing a “Rashtriye Ekta Yatra” which has the message of “One Country one Constitutions one Nation” and this Yatra will start from Kolkatta on 12th of January 2011 and reach Srinagar on 26th of January 2011. covering the distance of almost 3100 kms approx. The aim of this Yatra is to spread the awareness about the situation of Kashmir and its people to the nations and its youth and requesting them to contribute their valuable thoughts about One Nation philosophy.

The Goal of this Yatra is to hoist the Trio Colour at the Historical Lal Chowk on the 26th January to convey the message to the deaf that it’s(Kashmir) a integral part of India you can’t divide us.

Thanks and regards